Published on June 9, 2026 | Views: 220
गोवर्धन । पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीधाम गोवर्धन के दिल्ली सेवा सदन में भव्य श्रीमद्भागवत रस कथा का शुभारंभ किया गया। कथा के पहले दिन कथा स्थल से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें भक्ति का एक अनूठा संगम देखने को मिला।
कलश यात्रा में स्थानीय और श्रद्धालु महिलाओं ने भाग लिया। यात्रा का मुख्य आकर्षण पीले वस्त्रों में सजी माताएं और बहनें थीं, जो अपने सिर पर मंगल कलश धारण कर जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। कलश यात्रा के दौरान वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय रहा। बैंड-बाजों की मधुर और धार्मिक धुनों पर श्रद्धालु झूमते और नाचते नजर आए। ठाकुरजी के जयकारों से पूरा गोवर्धन धाम गुंजायमान हो उठा। कथा का वाचन ब्रज रसिक गोपाल कृष्ण शास्त्री द्वारा किया जा रहा है। यह श्रीमद्भागवत कथा 8 जून से 14 जून तक प्रतिदिन सायं 04 बजे से चलेगी। भागवत कथा के पहले दिन कथाव्यास गोपाल कृष्ण शास्त्री ने कलश यात्रा का महत्व बताते कहा कि सिर पर कलश धारण करना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने मस्तिष्क और विचारों में सात्विकता तथा ईश्वर की भक्ति को सर्वाेच्च स्थान दे रहे हैं। कथा वाचक ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा और मानव जीवन में इसके महत्व पर विचार व्यक्त करते कहा कि भागवत केवल ग्रंथ नहीं, साक्षात कृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना किसी सौभाग्य से कम नहीं है। उन्होंने कहा, यह जीवन की सबसे पवित्र, अनमोल और सुनहरी घड़ी है। मानव जीवन अनमोल है और इसे व्यर्थ की चिंताओं में गंवाने के बजाय हरि नाम संकीर्तन और भागवत भक्ति में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोवर्धन की इस पावन माटी का कण-कण कृष्णमय है। यहां बैठकर जो भी भक्त सच्चे मन से सात दिनों तक इस रस कथा का पान करेगा, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।
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