मिलावट खोरी के खिलाफ न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला, 5 लाख रुपए का अर्थ दंड 10 साल की सजा

Published on May 9, 2026 | Views: 314

मिलावट खोरी के खिलाफ न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला, 5 लाख रुपए का अर्थ दंड 10 साल की सजा

डा हरिप्रकाश लवानिया,
धौलपुर: जिला एवं सेशन न्यायालय धौलपुर द्वारा नव वर्ष पुराने मामले में दूध में मिलावट करने वाले मिलावट कोणों के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाया है योग मिलावटखोरो को स्पष्ट संदेश देता है न्यायालय ने नौ आरोपियों को 10 साल की सजा एवं ₹5लाख रुपए रुपए के आर्थिक दंड की सजा सुनाईहै कुल नौ लोगों को अपराधी मानते हुए 45 लख रुपए का आर्थिक दंड दिया है कल 14 आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा न्यायालय में चालान पेश किया गया था जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है तथा चार आरोपियों को साक्ष के अभाव में बरी कर दिया गया न्यायालय ने नए संजय चौहान निवासी निवासी बजरिया धौलपुर वृंदावन निवासी पोखरा थाना निहालगंज बैजनाथ निवासी भोलापुर थाना सदर शिशुपाल निवासी सेंटर रोड धौलपुर प्रमोद निवासी सुल्तानपुर थाना कंचनपुर जसवंत निवासी सिंघोनिया मुरैना जितेंद्र निवासी कासिमपुर को धारा 328 120 बी के तहत 10 साल के कठोर कारावास एवं प्रत्येक आरोपित पर पांच-पांच लाख रुपए का अर्थ दंड लगाया है न्यायालय ने अपने निर्णय में फॉर्मलीन को घातक रसायन व धीमा जहर बताते हुए डिटर्जेंट जैसी घातक चीजों से दूध बनाकर आने वाले पीडियो के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ बताया

अब जरा वास्तविकता के धरातल पर उतरते हैं भारत में दूध के उत्पादन एवं खपत में करीबन दो गुना अंतर है पिछले वर्ष भारत में 2306 लाख टन दूध का उत्पादन हुआ जबकि खपत लगभग दोगुनी हुई इसका सीधा मतलब है कि भारत में नकली दूध का कारोबार लगभग हजारों करोड रुपए का है देश की जीडीपी में डेयरी सेक्टर का योगदान 5 फीसदी है जो लगभग 8 करोड लोगों को रोजगार मुहैया कराता है भारत में दूध के कुल उत्पादन में शिक्षा मंत्री एवं 47% भैंसों का योगदान है ऐसे में सारे आंकड़े होने के बावजूद सरकार द्वारा दूध में मिलावट रोके जाने हेतु गंभीरता नहीं दिखाना सरकार की मनसा पर सवाल खड़े करता है 2025 में पशुपालन सांख्यिकी के अनुसार प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 485 ग्राम प्रतिदिन दर्ज की गई है देश में उत्तर प्रदेश सर्वाधिक दूध उपलब्ध कराने वाला राज्य है भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है जिसका विश्व के दूध उत्पादन में 22% के आसपास योगदान है विकासशील देशों में दूध का उत्पादन एवं इससे बने खाद्य पदार्थों के उपयोग की लंबी परंपरा रही है
देश में दूध के उत्पादन एवं खपत के बीच का अंतर कैसे पूरा किया जाता है यह सरकार एवं जिम्मेदार लोगों के पूरी तरह संज्ञान में है भारतवर्ष में दूध का संकलन केदो के माध्यम से होकर दरी तक पहुंचता है जहां से प्रोसेसिंग के बाद दूध को विभिन्न रूपों में पैक करने के बाद सप्लाई किया जाता है तथा दूध से बने अन्य खाद्य पदार्थों का निर्माण कर उन्हें विभिन्न उत्पादों के रूप में बाजारों तक पहुंचाया जाता है अनेक क्षेत्रों में घर-घर जाकर दूध सप्लाई किया जाता है किंतु सरकारी तंत्र के ढुलमुल रवैये से इस दूध में भी प्रायबेखोफ मिलावट का धंधा खूब फल फूल रहा है इसी का फायदा उठाकर दुग्ध संकलन केदो से लेकर आपूर्ति तक के बीच में मोटा मुनाफा कमाने के लिए मिलावट का खेल शुरू होता है यहां तक की माफिया द्वारा स्वास्थ्य के लिए घातक माने जाने वाले केमिकलों का प्रयोग भी खूब होता है दिन में यूरिया फार्मोलिन डिटर्जेंट स्टार्च ग्लूकोस एवं अन्य केमिकल शामिल है धौलपुर जिले में दूध लोगों के रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है दूध के अलावा घी एवं बड़ी मात्रा में खोवा बनाकर देश भर की मंडियो में सप्लाई किया जाता है जिनसे बनी मिठाइयां खुलेआम बेची जाती हैं कभी कभार उपस्थिति दर्ज करने के लिए संबंधित विभाग द्वारा सैंपल लेने का उपक्रम किया जाता है इन मिलावटी दूध घीछाछ एवं खोवे से पाचन तंत्र उत्सर्जन तंत्र स्वसन तंत्र प्रजनन तंत्र बुरी तरह प्रभावित होते हैं यहां तक कि कैंसर उत्पन्न करने वाले कारणो में भी यह महत्वपूर्ण घटक माने जाते हैं यहां तक के इसी दिल के प्रयोग से बच्चों के स्वास्थ्य से खुलेआम खिलवाड़ की जाती है
यदि सजा के प्रावधानों की बात करें तो मिलावटी दूध या इससे बने पदार्थ से मृत्यु होने पर या गंभीर नुकसान होने पर 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है तथा 10 लाख या इससे अधिक जुर्माना हो सकता है कई राज्यों में कानून में संशोधन कर सीधे आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है सुप्रीम कोर्ट भी दूध में मिलावट को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए इस उम्र कैद के साथ दंडनीय बनाने की सिफारिश कर चुका है
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वच्छ एवं प्राकृतिक वातावरण एवं खान-पान की आवश्यकता होती है किंतु देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण से सांस लेने में दिक्कत हो रही है बच्चों एवं युवा पीढ़ी को बिना मिलावटी दूध एवं अन्य खाद्य पदार्थ उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं ऐसे में आयुष्मान आरोग्य योजना या विभिन्न योजना ओ से पहले यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने पर ध्यान दिया जाए तो युवा पीढ़ी अपने स्वास्थ्य का संरक्षण एवं संवर्धन करने में सफल हो सकती है अतः सरकार को चाहिए की कागजी घोड़े दौड़ाने के बजाय यथार्थ के धरातल पर उतरकर इस दिशा में प्रभावी कार्यवाही एवं कार्य योजना का क्रियान्वयन किया जाए जिसमें सरकारी मशीनरी के अलावा आम जनता को जागरूक बनाने का मिशन भी शामिल हो

Category: Rajasthan


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