Published on October 28, 2026 | Views: 256
डी डी शर्मा
मथुरा के सुरीरबघा मोहल्ला चांद पर पहुंच चुके इंसान के दौर में भी मथुरा जनपद के सुरीर कस्बे का एक मोहल्ला ऐसा है, जहां हिंदू महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत नहीं रखतीं। मान्यता है कि करीब 250 साल पहले एक नवविवाहिता ब्राह्मणी ने पति की हत्या से आहत होकर श्राप दिया था। तभी से इस मोहल्ले में करवाचौथ ही नही मनाती हैँ.
सुरीर के मोहल्ला बघा में करवाचौथ के दिन चांद तो निकलता है, लेकिन सुहागिनें सोलह शृंगार कर चांद का दीदार नहीं करतीं। इस परंपरा का सबसे अधिक मलाल उन नवविवाहिताओं को होता है, जिनकी शादी के बाद यह पहला करवाचौथ होता है। इसी वर्ष शादी करके आई प्रिया पत्नी डव्वू ठाकुर भी पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखना चाहती थीं, लेकिन ससुराल वालों ने सती के श्राप की मान्यता बताते हुए उन्हें परंपरा का पालन करने को कहा।
वहीं, करीब आठ वर्ष पहले ब्याहकर आई सपना के मन में भी पहले करवाचौथ पर व्रत रखने की उमंग थी, लेकिन परंपरा के चलते उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। मोहल्ले की बुजुर्ग सुनहरी देवी, बबीता देवी, सुनीता देवी,कमलेश, गोरा, गीता देवी, जानकी, पूनम सीमा और गंगाधर का कहना है कि वे व्रत के बजाय परिवार की सलामती पर विश्वास रखते हैं। रामवती का कहना है कि सती माता अब श्राप नहीं, आशीर्वाद देती हैं, लेकिन वर्षों पुरानी परंपरा को तोड़ने की हिम्मत किसी में नहीं है।
क्या है सती के श्राप की कहानी?
स्थानीय मान्यता के अनुसार, करीब 250 साल पहलेथाना नौहझील क्षेत्र के रामनगला गांव का एक ब्राह्मण युवक गौना कराकर अपनी नवविवाहिता पत्नी को भैंसा-बुग्गी से घर ले जा रहा था। सुरीर में कुछ लोगों ने बुग्गी रोककर भैंसे पर अपना दावा किया। इसी विवाद में ब्राह्मण युवक की हत्या हो गई। पति की मौत से आहत नवविवाहिता ने मोहल्ले के लोगों को श्राप दिया और सती हो गई।
कहा जाता है कि इसके बाद मोहल्ले में कई नवविवाहिताओं के विधवा होने और युवाओं की मौत की घटनाएं हुईं। बुजुर्गों ने इन्हें सती के श्राप से जोड़कर देखा। तभी से यहां करवाचौथ नहीं मनाने की परंपरा चली आ रही है। महिलाएं पूरा शृंगार करने से भी परहेज करती हैं।
स्थानीय मान्यता के मुताबिक, रामनगला गांव के ग्रामीण भी आज तक सुरीर में खाना खाने और पानी पीने से बचते हैं। कस्बे में सती माता का मंदिर बना हुआ है, जहां विभिन्न जातियों के लोग शादी-विवाह जैसे शुभ अवसरों पर माथा टेककर पूजा-अर्चना करते हैं।
Category: Uttar pradesh