Published on October 28, 2026 | Views: 354
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को 31 अक्टूबर तक सभी लंबित एस्टीमेट जमा करने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2026-27 की पर्यटन कार्ययोजना के तहत 511 परियोजनाओं के एस्टीमेट तैयार किए जाने हैं, जिनमें से 260 प्राप्त हो चुके हैं, जबकि 251 अभी बाकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय समय में एस्टीमेट उपलब्ध कराए जाएं, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी न हो। इस योजना में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की 22 परियोजनाएं भी शामिल हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अपर मुख्य सचिव एवं पर्यटन महानिदेशक अमृत अभिजात के साथ बैठक कर संग्रहालयों के विकास, पर्यटकों की सुविधाओं, सांस्कृतिक गतिविधियों और पर्यटन संपत्तियों के संचालन की समीक्षा की। बैठक में झांसी, फिरोजाबाद, वाराणसी, देवरिया, बिजनौर और सुल्तानपुर में विकसित हो रहे संग्रहालयों की स्थिति पर चर्चा हुई। फिरोजाबाद के ग्लास म्यूजियम और वाराणसी के लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में संग्रहालय संबंधी तैयारियों की समीक्षा की गई। बिजनौर में दुष्यंत कुमार के पैतृक आवास पर संग्रहालय विकसित करने की योजना भी व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए।
पर्यटन स्थलों की विरासत को पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए मंत्री जयवीर सिंह ने सभी पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं पर शिलालेख लगाने के भी निर्देश दिए। इन शिलालेखों के माध्यम से पर्यटकों को संबंधित स्थल के धार्मिक महत्व, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय परंपराओं की जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि हर पर्यटन स्थल की अपनी विशेष पहचान होती है, जिसे वहां आने वाले लोगों तक सरल तरीके से पहुंचाना जरूरी है। पर्यटन स्थलों पर लगाए जाने वाले सूचना पटों के लिए क्यूआर कोड तैयार करने का काम भी किया जा रहा है। इसके तहत जिलों से स्वीकृत सामग्री को पर्यटन विभाग की वेबसाइट से जोड़ा जाएगा, जिससे पर्यटक क्यूआर कोड स्कैन कर संबंधित स्थल के इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
फिरोजाबाद में विकसित हो रहे ग्लास म्यूजियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने के लिए इटली के ग्लास म्यूजियम से प्रेरणा लेने पर जोर दिया गया। अमृत अभिजात ने कहा कि भारत के पहले समर्पित ग्लास म्यूजियम के रूप में विकसित हो रहे इस संग्रहालय में कांच की कला, शिल्प और विरासत को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। वहीं, बाराबंकी में हॉकी के दिग्गज केडी सिंह बाबू के पैतृक आवास पर विकसित हो रहे स्मारक एवं संग्रहालय को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने इस परियोजना में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी की मौजूदगी में स्थल निरीक्षण करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तय समय में परियोजना पूरी करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
लखनऊ के लोक कला संग्रहालय को भी अधिक आकर्षक और उपयोगी बनाने की तैयारी है। करीब 14.99 करोड़ रुपये की इस परियोजना में अतिरिक्त दीर्घाएं, बच्चों के लिए गतिविधि क्षेत्र, कार्यशालाओं के लिए स्थान, बेहतर लैंडस्केपिंग और लोक कला से जुड़ी कलात्मक संरचनाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं से बच्चों, युवाओं और परिवारों को प्रदेश की लोक परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। बैठक में लखनऊ के नौसेना शौर्य संग्रहालय, आगरा के छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय और महोबा के सूर्य मंदिर इंटरप्रिटेशन सेंटर एवं तारामंडल की क्यूरेटोरियल तैयारियों की भी समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं में प्रदर्शित की जाने वाली सामग्री और पर्यटकों को मिलने वाले अनुभव को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
पर्यटन सुविधाओं के संचालन की दिशा में विभाग की ओर से कार्यदायी संस्थाओं से 616 परियोजनाएं हस्तांतरित किए जाने की जानकारी दी गई। सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु में 27 अक्टूबर को संचालन संबंधी समझौता पूरा कर चयनित एजेंसी को संपत्तियां सौंप दी गईं। इनमें कॉटेज, डॉरमेट्री और पर्यटन सूचना सुविधाएं शामिल हैं। इसके साथ ही बुद्ध थीम पार्क, साउंड एंड लाइट शो, पार्किंग, शौचालय और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी वाली एकीकृत बौद्ध पर्यटन परिसर परियोजना भी इस गंतव्य का हिस्सा है। इन सुविधाओं से पर्यटकों को यहां रुककर आसपास के पर्यटन स्थलों को देखने में मदद मिलेगी। वहीं, संकिसा में विपश्यना एवं पर्यटक सुविधा केंद्र का निर्माण शुरू हो चुका है। बहराइच में महाराजा सुहेलदेव स्मारक के संचालन का समझौता भी हो गया है और संपत्ति संबंधित एजेंसी को सौंप दी गई है।
पर्यटन संपत्तियों के संचालन के लिए अन्य स्थानों पर भी व्यवस्थाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। उन्नाव के बक्सर स्थित मां चंद्रिका देवी गेस्ट हाउस और उत्तराखंड के बदरीनाथ स्थित यूपी पर्यटन विभाग के गेस्ट हाउस के संचालन के लिए एजेंसियों का चयन कर लिया गया है। अब इनके साथ समझौते की औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। बैठक में लखनऊ, सीतापुर, बरेली, चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी में प्रस्तावित परंपरा केंद्रों पर भी चर्चा हुई। इन केंद्रों को पर्यटन और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक ही स्थान पर सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है। इनके लिए भूमि की उपलब्धता और उपयुक्त स्थल की पहचान करने के संबंध में जिला प्रशासन के साथ समन्वय किया जाएगा।
प्रदेश में सांस्कृतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रस्तावित 'रंग यूपी' पहल पर भी विचार किया गया। इसके तहत सभी 75 जिलों में तहसील स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने की परिकल्पना है। इसका उद्देश्य युवाओं की भागीदारी बढ़ाना, सांस्कृतिक नवाचार को प्रोत्साहित करना और आजीविका के नए अवसर तैयार करना है। इस पहल से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की भागीदारी का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही लखनऊ में संस्कृति भवन और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के नए परिसर के लिए भूमि संबंधी योजना की समीक्षा की गई। पर्यटन स्थलों की जानकारी को व्यवस्थित करने के लिए तैयार की जा रही टूरिज्म मैट्रिक्स में सभी 75 जिलों का विवरण दर्ज किया जा चुका है। क्षेत्रीय कार्यालयों को भी अपने रिकॉर्ड लगातार अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऐतिहासिक स्थलों को शाम के समय भी पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने की दिशा में फतेहपुर सीकरी की परियोजना पर काम जारी है। यहां जोधाबाई महल में 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग के साथ साउंड एंड लाइट शो का काम 85 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि इससे जुड़े मार्गों और महल की रोशनी की व्यवस्था का काम 78 प्रतिशत पूरा हुआ है। वाराणसी में काशी-सारनाथ हेरिटेज स्ट्रीटस्केप परियोजना भी समीक्षा का हिस्सा रही। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत करीब 37.15 करोड़ रुपये की इस परियोजना को 29 सितंबर को स्वीकृति मिली थी। इसके लिए कार्यदायी संस्था के नाम का प्रस्ताव 22 अक्टूबर को राज्य सरकार को भेजा गया। आगरा और मथुरा के हेलीपोर्ट के संचालन पर भी चर्चा हुई। अमृत अभिजात की अध्यक्षता में 29 अक्टूबर को संबंधित डेवलपर के साथ बैठक निर्धारित की गई, जिसमें संचालन शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया जाना है।
बैठक में अयोध्या के दीपोत्सव और वाराणसी की देव दीपावली की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अयोध्या के सांस्कृतिक कार्यक्रम में देश-विदेश की रामलीला प्रस्तुतियां, शहर के विभिन्न स्थलों पर लोक कलाओं के कार्यक्रम और सांस्कृतिक संस्थानों की प्रदर्शनियां शामिल करने की तैयारी है। इसके साथ ही पर्यटन विभाग की वार्षिक कार्ययोजना और सांस्कृतिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री नेकहा कि, प्रदेश सरकार का जोर धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने, स्थानीय विरासत की जानकारी पर्यटकों तक पहुंचाने तथा पर्यटन संपत्तियों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने पर है। साथ ही अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को लंबित एस्टीमेट समय पर जमा करने, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने और परियोजनाओं को तय समयसीमा में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
Category: Uttar pradesh