अबीर-गुलाल की बदरी के बीच कांच के विमान पर निकले ठाकुरजी, रंगनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

Published on March 12, 2026 | Views: 167

अबीर-गुलाल की बदरी के बीच कांच के विमान पर निकले ठाकुरजी, रंगनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

वृंदावन। कान्हा की नगरी में होली की खुमारी अभी भी भक्तों के सिर चढ़कर बोल रही है। ब्रज के सबसे बड़े और भव्य श्री रंगनाथ मंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के छठे दिन भक्ति और रंगों का अनूठा संगम देखने को मिला। जब ठाकुर गोदा रंगमन्नार भगवान कांच के विमान पर सवार होकर भक्तों संग होली खेलने निकले, तो पूरा वातावरण 'जय रंगनाथ' के जयघोष और अबीर-गुलाल की सतरंगी आभा से सराबोर हो गया।
श्वेत धवल पोशाक में ठाकुरजी ने बरसाया टेसू का रंग
ब्रह्मोत्सव के विशेष अवसर पर ठाकुर गोदा रंगमन्नार ने श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। वेदमंत्रों के सस्वर पाठ के बीच भगवान को प्राकृतिक अबीर और गुलाल निवेदित किया गया। इसके पश्चात मंदिर के पुजारियों ने चांदी की पिचकारी से टेसू के फूलों से बने केसरिया रंग की बौछार शुरू की।

जैसे ही भगवान की सवारी कांच के विमान में विराजी होकर मंदिर के सिंह द्वार पर पहुँची, भक्तों का उत्साह चरम पर पहुँच गया। यहाँ गोविंद घेरा के क्षत्रिय समाज की महिलाओं ने पारंपरिक ब्रज वेशभूषा में सज्ज होकर भक्तों पर प्रेम-पगी लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। लाठियों के प्रहार और ढालों के बचाव के बीच ब्रज के इस पारंपरिक 'हुरंगे' ने श्रद्धालुओं को रस-विभोर कर दिया।
सूर्य की तपिश पर भारी पड़ा भक्तों का उल्लास
दोपहर की तीखी धूप और भगवान भास्कर की तपिश भी श्रद्धालुओं के जोश को कम नहीं कर सकी। शोभायात्रा जैसे-जैसे बड़े बगीचे की ओर बढ़ी, रंगों की मस्ती और बढ़ती गई। लगभग तीन घंटे तक नगर भ्रमण के बाद जब सवारी वापस मंदिर पहुँची, तो मंदिर प्रबंधन की ओर से हुरंगा खेलने आई महिलाओं को ठाकुरजी का 'प्रसादी फगुआ' भेंट किया गया।
ब्रज के 40 दिवसीय होली उत्सव को मिला विश्राम
बसंत पंचमी से आरंभ हुए ब्रज के विश्व प्रसिद्ध होली महोत्सव को श्री रंगनाथ भगवान की इस दिव्य होली के साथ ही इस वर्ष के लिए विश्राम मिल गया। भगवान रंगनाथ और माता गोदा ने जब भक्तों के साथ होली खेली, तो हर कोई भजनों की धुन पर झूमता नजर आया। इस आयोजन के साथ ही ब्रज की गलियों में गूंजने वाले 'होरी रे होरी' के स्वर अब अगले वर्ष के इंतज़ार में शांत हो गए हैं।

Category: Dharm


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