Published on February 28, 2026 | Views: 160
वृन्दावन। ब्रह्मलीन विरक्त शिरोमणि परमहंस श्री स्वामी वामदेव जी महाराज के जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित 'शताब्दी आनंद महोत्सव' का आज शनिवार को चैतन्य विहार स्थित वामदेव ज्योतिर्मठ में मंगलमय शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के देश के प्रख्यात संतों और मनीषियों ने स्वामी जी के त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद किया।
महोत्सव की शुभारंभ पादुका पूजन के साथ हुई, जिसके पश्चात जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, निर्मल पीठाधीश्वर महंत स्वामी ज्ञान देव सिंह, महानिर्वाणी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर राजगुरु स्वामी विशोकानंद भारती महाराज, अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद के साथ-साथ अनेक संतों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर संपूर्ण परिसर 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान रहा, जो स्वामी वामदेव जी का प्रिय संबोधन था।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने की। उपस्थित वक्ताओं ने स्वामी वामदेव महाराज को विद्वत्ता, सरलता और निर्भीकता की प्रतिमूर्ति बताया, जो दम्भ और मद जैसे दोषों से कोसों दूर थे।
स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने कहा कि 'वयं राष्ट्र जाग्यामः पुरोहिताः' के मंत्र के साथ स्वामी जी द्वारा राष्ट्र की जागृति के लिए किए गए कार्यों, विशेषकर श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में उनकी प्राणवायु जैसी भूमिका को याद किया गया।
महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि सनातन हिन्दू संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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