Published on July 19, 2026 | Views: 200
वृंदावन। विश्वविख्यात ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में वीआईपी संस्कृति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। बताया जाता है कि मंदिर में बाहरी जिलों से श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीमित अवधि, सामान्यतः छह माह के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी वर्षों तक वहीं तैनात रहते दिखाई देते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां एक ओर शासन और प्रशासन वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर प्रबंधन की कथित मिलीभगत से कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा चंद पैसों के बदले श्रद्धालुओं को वीआईपी प्रवेश दिलाने का काम किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इसका एक उदाहरण उस समय सामने आया, जब एक पुलिसकर्मी द्वारा कुछ श्रद्धालुओं को वीआईपी प्रवेश कराया गया। इसके बाद वे मंदिर परिसर के वीआईपी कटघरे में खड़े होकर केक काटते हुए नजर आए। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह मंदिर की परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं के विपरीत है।
मंदिर में अपने आराध्य ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रकार के दृश्य उनकी धार्मिक भावनाओं और आस्था को ठेस पहुंचाते हैं। उनका मानना है कि मंदिर परिसर में परंपराओं के विपरीत होने वाली गतिविधियां न केवल मंदिर की गरिमा को प्रभावित करती हैं, बल्कि दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी आहत करती हैं।
श्रद्धालुओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन और प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा मंदिर की परंपराओं, धार्मिक मर्यादा और सुरक्षा व्यवस्था की पवित्रता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
Category: Uttar pradesh