Published on May 22, 2026 | Views: 213
फरह। फरह 50 साल से अधिक समय तक गुलामी और दुर्व्यवहार झेलने वाली हथनी फूलकली ने आजादी के 14 साल पूरे कर लिए हैं। 2012 में उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने आगरा की सड़कों से भीख मांगते हुए बचाकर उसे मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में नया जीवन दिया था।
बचाए जाने से पहले फूलकली का जीवन पीड़ादायक था। गर्म तारकोल पर घंटों चलने से उसके पैरों में फोड़े, तलवे फटने और संक्रमित घाव हो गए थे। कुपोषण के साथ दाहिनी आंख में मोतियाबिंद के कारण वह उस आंख से देख भी नहीं पाती थी।
केंद्र में वाइल्डलाइफ एसओएस की देखरेख में फूलकली चमत्कारिक रूप से स्वस्थ हुई। लगभग 70 साल की फूलकली अब सर्कस से बचाई गई माया और गुलामी से छुड़ाई गई एम्मा के साथ तीन हाथियों के छोटे झुंड की मुखिया है। इलाज के दौरान वह सकारात्मक प्रतिक्रिया देती है और देखभाल करने वालों से उसका गहरा रिश्ता बन गया है।
अब उसके पैर के पुराने फोड़े की रोज ड्रेसिंग होती है। भीषण गर्मी से राहत के लिए बाड़े में पानी का पूल, फव्वारे और तरबूज-खीरा दिए जाते हैं। दलिया और सप्लीमेंट से आहार संतुलित रखा जाता है। एम्मा और माया के साथ रोज की सैर उसकी दिनचर्या है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के उप निदेशक डॉ. इलयाराजा ने कहा, “तीनों की संगति ने फूलकली के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाई है।” सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण बोले, “साथियों के साथ बनी तिकड़ी ही उसे भावनात्मक शक्ति देती है।”
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