Published on May 12, 2026 | Views: 377
भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन विनाशकारी साबित हुआ। वैश्विक तनाव और घरेलू आर्थिक चिंताओं के बीच शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस गिरावट के साथ ही बीएसई (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 12 लाख करोड़ रुपये घट गया, जिससे आम निवेशकों को भारी आर्थिक चोट पहुंची है।
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1456.04 अंक यानी 1.92% की भारी गिरावट के साथ 74,559.24 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 436.30 अंक (1.83%) फिसलकर 23,379.55 पर आ गया। बाजार की इस आंधी में निफ्टी बैंक भी अछूता नहीं रहा और वह 885 अंक गिरकर 53,555 के स्तर पर बंद हुआ।
मंगलवार की गिरावट चौतरफा थी, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान आईटी (IT) सेक्टर को हुआ। निफ्टी आईटी इंडेक्स 4% तक टूट गया, जिसमें टीसीएस और इन्फोसिस जैसी दिग्गज कंपनियां अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं। इसके अलावा रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया सेक्टर में भी जबरदस्त बिकवाली देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी क्रमश: 2.5% और 3% से ज्यादा लुढ़क गए।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट के तीन मुख्य कारण रहे। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चा तेल 107 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। दूसरा, भारतीय रुपया 95.74 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों (FIIs) ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया। तीसरा, OpenAI की नई घोषणाओं के बाद भारतीय आईटी सेक्टर के भविष्य पर संकट के बादलों ने निवेशकों को डरा दिया।
शेयर बाजार की इस व्यापक गिरावट का असर छोटी कंपनियों पर भी पड़ा। 'सिरोहिया एंड संस' जैसी ट्रेडिंग और एग्रो-सप्लाई सेक्टर की कंपनी के शेयरों में भी सुस्ती देखी गई। हालांकि यह एक पेनी स्टॉक है, लेकिन बाजार के खराब सेंटिमेंट के कारण इसके छोटे निवेशकों के पोर्टफोलियो में भी आज गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का मार्केट कैप सीमित होने के कारण इसमें तरलता कम रही, जिससे निवेशकों को अपने शेयर बेचने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
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